अवैध नल कनेक्शन और पाइप लाइन काटने पर लगेगा 5 हजार रुपये अर्थदंड

अवैध नल कनेक्शन और पाइप लाइन काटने पर लगेगा 5 हजार रुपये अर्थदंड

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मध्य प्रदेश में नगर पालिक अधिनियम और अन्य प्रविधानों में संशोधन किए जा रहे हैं, जिसमें अवैध नल कनेक्शन, पाइपलाइन काटने और भूस्वामी से जानकारी न देने पर जुर्माना बढ़ाया जाएगा। अब जुर्माना और सजा के बजाय अधिकारियों को अर्थदंड लगाने का अधिकार मिलेगा। यह बदलाव अनावश्यक कोर्ट प्रक्रिया से मुक्ति दिलाएगा।

पानी निकासी का रास्ता बदलने, पाइप लाइन काटने या अवैध नल कनेक्शन करने पर अब पांच हजार रुपये अर्थदंड लगेगा। इसी तरह भूस्वामी के संबंध में सही जानकारी नहीं देने पर एक हजार रुपये के जुर्माने को भी बढ़ाया जाएगा। नगर पालिक अधिनियम के इस तरह के कई अन्य प्रविधान भी संशोधित किए जाएंगे।

इसी तरह बिजली की चोरी, श्रम सहित राजस्व से जुड़े प्रविधान का उल्लंघन करने पर जुर्माना और सजा के प्रविधान को अर्थदंड में परिवर्तित किया जाएगा और इसे लगाने का अधिकार अधिकारियों को दिया जाएगा। इससे अनावश्यक कोर्ट-कचहरी और प्रशासकीय प्रक्रिया के झंझट से मुक्ति मिलेगी।

इसके लिए प्रदेश में केंद्र सरकार की तरह जन विश्वास विधेयक प्रस्तुत किया जाएगा। इसकी तैयारी की समीक्षा मुख्य सचिव अनुराग जैन ने शुक्रवार को मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ तीन घंटे बैठक कर की।

केंद्र सरकार ने वर्ष 2023 में कामकाज को सुगम बनाने और अनावश्यक प्रक्रियाओं को समाप्त करने के लिए जन विश्वास विधेयक प्रस्तुत किया था। इसी तरह अब मध्य प्रदेश में भी विधेयक प्रस्तुत करने की तैयारी है।

सूत्रों के अनुसार नगरीय विकास एवं आवास, श्रम, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, ऊर्जा सहित अन्य विभागों के उन प्रविधानों को संशोधित किया जाएगा, जिनमें जुर्माने और कारावास का प्रविधान है।

इन मामलों में प्रकरण बनाकर कोर्ट में प्रस्तुत करना होता है। इसमें काफी समय लगता है, जबकि अर्थदंड लगाकर दंडित किया जा सकता है। औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन विभाग विधेयक का प्रारूप तैयार कर रहा है और सभी संबंधित विभागों से उनके प्रचलित अधिनियम में किए जाने वाले संशोधन की जानकारी मांगी गई है।

नगरीय विकास एवं आवास विभाग नगर पालिका अधिनियम 1961 की 22 धाराओं में संशोधन करेगा। कोई व्यक्ति यदि निकाय द्वारा चाही गई जानकारी समय पर नहीं देता है तो एक हजार रुपये अर्थदंड लगाया जाएगा। इसी तरह बिना अनुमति भवन निर्माण करने पर जो पांच हजार रुपये का जुर्माना निर्धारित है, उसे बढ़ाया जाएगा।

अर्थदंड लगाने का अधिकार नगर निगम के कमिश्नर, नगर पालिका और नगर परिषद मुख्य नगर पालिका अधिकारी को दिए जाएंगे। जीएसटी लागू होने के बाद चुंगी क्षतिपूर्ति और पथकर के प्रविधान विलोपित किए जाएंगे। इसी तरह श्रम, बिजली, उद्योग, स्वास्थ्य, राजस्व से जुड़े मामलों में भी अर्थदंड लगाने का अधिकार अधिकारियों को दिया जाएगा।

बैठक में मुख्य सचिव ने सभी अधिकारियों को दो-तीन दिन में अपने-अपने अधिनियम में संशोधन प्रस्तावित करने के निर्देश दिए हैं ताकि 16 दिसंबर से प्रारंभ हो रहे विधानसभा के शीतकालीन सत्र में जन विश्वास विधेयक प्रस्तुत किया जा सकें।

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